हींग (ऐसाफिटिडा) के फायदे, नुकसान, डोज़ और उपयोग का तरीका

हिंग एक बहुत ही प्राचीन और पूरी दुनिया का जाना मन मसाला है जिसमें की असंख्य औषधीय गुण होते हैं, आयुर्वेद में यह कई दवाइयों में और घरेलू उपचारों में प्रयोग की जाती है। जानिये इसके फायदे, उपयोग का तरीका और सावधानियां।

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हींग तो हम सभी भारतीय घरों में मौजूद होती है। दाल में तड़का हो या बेसन के पकौड़े, बिना हींग के नहीं बनते। कोई भी गैस बनाने वाला खाना बनाते समय हींग को ज़रूर डालते हैं।

हींग में एक अलग तरह की गंध होती है। कम मात्रा में भी हींग को डाल दें तो पूरा घर महक जाता है। ऐसा इसमें मौजूद सल्फर युक्त वाष्पशील तेल के कारण से होता है। हींग को डालने से भोजन को खाने के बाद गैस नहीं बनती और खाना आसानी से पाच भी जाता है। हींग हर जगह सुलभता से मिल भी जाती है।

हींग को न केवल मसाले की तरह बल्कि आप दवाई की तरह से भी इस्तेमाल कर सकते हैं। अगर आपको गैस बन रही है तो हींग को कम मात्रा में पानी के साथ निगल कर देखें। इससे गैस कुछ ही देर में कम हो जायेगी। गैस मारना हींग का मुख्य गुण है। इसके अलावा भी आप हींग को अन्य स्वास्थ्य लाभों के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं। बस ध्यान रहे, हींग को लेने की मात्रा कम हो और हींग की क्वालिटी अच्छी हो। आजकल जो मार्किट में हींग दानेदार सी मिल रही है उनमें हींग कम और आटा ज्यादा है। तो ऐसी हींग के इस्तेमाल से आपको ज्यादा फायदा नहीं होगा और आपको लगेगा हींग काम ही नहीं करती।

हींग क्या है?

आपने हींग तो बहुत इस्तेमाल की है। लेकिन क्या आपको पता है यह पेड़ का कौन सा हिस्सा है और अच्छी हींग महंगी क्यों है। तो हम आपको बताते हैं की हींग है क्या।

हींग, तेल और रालयुक्त पेड़ का गोंद है जिसे इंग्लिश में ओले-गम-रेसिन कहते हैं। जब हींग के पौधे की जड़ एवं तने पर चीरा लगाते हैं तो यह गोंद मिलती है। हींग स्वाद में कड़वी और गंध में अप्रिय होती है।

हींग के पौधे पांच फुट तक ऊँचे हो सकते हैं। इनका तना कोमल होता है। पत्तियां कोमल, रोयेंदार, संयुक्त, 2-4 पक्ष युक्त होती हैं। फूलों का रंग पीला होता है और गाजर कुल के अन्य पौधों के तरह छतरी की तरह निकलते हैं। इसकी जड़ें गाजर की तरह कन्द होती हैं। इन कन्द रुपी जड़ों से 4-5 साल की आयु होने पर हींग को प्राप्त किया जाता है। हींग के फल अज्जूदान कहलाते हैं। पत्तो का भी साग बनाकर खाया जाता है।

हींग को प्राप्त करने के लिए, मार्च-अप्रैल में फूल आने के पहले, जड़ों के पास की मिट्टी को खुरच कर हटा लिया जाता है। इससे जड़ें बाहर दिखने लगती है। इसके बाद जड़ के कुछ ऊपर तने से पौधा पूरा काट दिया जाता है। कटे तल से सफ़ेद रंग का गाढ़ा स्राव निकलने लगता है। इस पर धूल-मिट्टी न जमे इसलिए इन्हें ढक दते हैं। कुछ दिनों के बाद, निकले पदार्थ को खुरच कर रख लेते हैं तथा दूसरा कट लगा देते हैं, जिससे नया निर्यास मिल सके। इस तरह कुछ महीने हींग को इकठ्ठा करते हैं जब तक स्राव होना बंद न हो जाए।

बाज़ार में कई प्रकार की हींग उपलब्ध है। इनमे से हीरा हींग सबसे उत्तम मानी जाती है। महंगी होने से बहुत से नकली और घटिया गुणवत्ता की हींग भी मार्किट में उपलब्ध है। दवा के रूप में उत्तम हिंग को कम मात्रा में प्रयोग करने से ही फायदा होता है।

हींग को इकट्ठा करना मुश्किल है और इसलिए यह बहुत महंगी होती है।

हींग को लेने की डोज़

हींग को लेने की औषधीय मात्रा 125-500 mg है। अधिकतर मामलों में 250mg मात्रा पर्याप्त होती है।

यह मात्रा अच्छी क्वालिटी की हींग के लिए है।

शरीर के प्रकार के अनुसार डोज़

  • वात प्रकृति बॉडी 125 से 250 मिलीग्राम घी के साथ।
  • पित्त प्रकृति 10 मिलीग्राम से 62.5 मिलीग्राम घी के साथ।
  • कफ प्रकृति 250 से 1000 मिलीग्राम घी या गर्म पानी के साथ ।

हींग के फायदे

भारतीय मसाला हींग को भोजन और हर्बल दवाओं में इस्तेमाल करते हैं। यह पाचन की बीमारियों जैसे गैस, पेट फूलना, आदि में मुख्य रूप से फायदेमंद है। हींग का मुख्य एक्टिव पदार्थ इसका अस्थिर तेल है, जो उड़ता है और इसको अलग गंध देता है। हींग का असर एंटीस्पाज्मोडिक और हाइपोटेंशियल होता है।

हींग को दवा की तरह से इस्तेमाल करने के लिए इसे पहले घी में भून लेते हैं।

इसे लेने से शरीर में गर्मी आती है जिससे पाचन ठीक से होता है और गैस नहीं बनती। हींग आक्षेपनिवारक, आध्माननाशक, बल्य, मृदु विरेचक, मूत्रल, रजःप्रवर्तक, कृमिघ्न और वृष्य है। पारंपरिक दवाओं में, इसका उपयोग पाचन रोग, मानसिक विकार, हृदय रोग, और श्वसन संबंधी विकारों के लिए किया जाता है।

हींग सबसे सूटेबल कफ वाले लोगों के लिए है और सबसे कम पित्त प्रकृति के लोगों के लिए है। अगर आप को कफ बलगम ज्यादा है, कफ प्रकृति है तो आप इसे घी में भून कर एक ग्राम तक की मात्रा में भी ले सकते है। लेकिन एसिडिटी, अल्सर, खट्टी डकार में इसे लेने की ज़रूरत है तो आपको इसे कम डोज़ में लेने में ही भलाई है।

हींग करे पाचन दुरुस्त

हींग को खाने से पित्त बढ़ता है। इसलिए, पित्त की कमी से होने वाले अपच में इसे लेने से आपको फायदा होता है। वायुनाशक होने से इसे आप गैस, आध्मान-शूल, ग्रहणीशूल में, खा सकते हैं।

अपच में हींग को तड़के के रूप में प्रयोग करें।

पेट में दर्द, गैस, अफारा में निम्न प्रयोग कर सकते हैं:

  • नाभि के आस-पास पेस्ट रूप में लगाएं।
  • एक रत्ती हींग को गर्म पानी के साथ निगल जाएँ।
  • घी में भुनी हींग दो चुटकी को अजवाइन, हरीतकी, काला नमक (प्रत्येक 2 ग्राम) के साथ मिला बारीक़ चूर्ण बना कर रख लें। इसे खाना खाने के बाद चौथाई-आधा चम्मच लें।
  • भुनी हींग को सेंध नामक के साथ कम मात्रा में लें।
  • हिंग्वाष्टक चूर्ण का सेवन करें।
  • हींग को आधा चम्मच अजवाइन के साथ गर्म पानी के साथ लें।
  • हींग को सिरके के साथ चाट कर लें।
  • हींग चुटकी भर, अदरक रस आधा चम्मच, नीबू एक चम्मच, काली मिर्च का चूर्ण को मिलाकर गर्म पानी के साथ लें।

हींग बढाये भूख

भुनी हींग को 1 रत्ती की मात्रा में पिप्पली के चूर्ण और शहद के साथ लेंने पर भूख बढती है।

हींग आराम दे साइटिका में

कटिस्नायुशूल या गृध्रसी में 125 मिलीग्राम हींग को दो रत्ती 250 मिलीग्राम पुष्करमूल (इनुला रेसमोसा) को निरुगुंडी के काढ़े के साथ लेते हैं।

हींग कम करे सूजन

हींग में दर्द निवारक और सूजन उतारने के गुण होते है। इसे लेने से शरीर में टोक्सिन कम होते हैं। जब आप इसे आधे महीने तक प्रयोग करते हैं तो जोड़ों पर इसका असर दीखता है। इस प्रयोग से सूजन और दर्द कम हो जाता है।

हींग घटाए कफ

हींग, लेने से कफ कम होता है। इसे लेने से गर्मी आती है और कफनाशक होने से पुराने कफ रोग व अस्थमा में फायदा करती है। यह खांसी, अस्थमा और ब्रोंकाइटिस के लिए एक उत्कृष्ट उपाय है।

खांसी, टीबी में शहद के साथ हींग को चाट कर लें।

सांस की तकलीफ में पानी में घोल कर हींग का सेवन करें।

हींग करे उच्च कोलेस्ट्रॉल के स्तर मे फायदा

हींग को जब आप लेते हैं तो यह कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम करती है। यह गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल ट्रैक्ट में कोलेस्ट्रॉल अवशोषण को कम कर सकती है और शरीर में कोलेस्ट्रॉल चयापचय में सुधार करके रक्त कोलेस्ट्रॉल को कम करती है।

हींग फायदा करे जहर में

अगर जहरीले कीट, बिच्छू, ततैया आदि काट लेवें तो प्रभावित जगह पर हींग का पेस्ट बनाकर लगायें।

हींग सुखाये घाव

पुराना घाव है तो हींग को नीम के पत्तों के साथ पीसकर लेप लगाएं।

हींग दे दिल को बल

हींग के प्रयोग से हृदय को ताकत मिलती है, थक्का नहीं जमता और रक्त संचार ठीक होता है।

हींग फायदेमंद है हिस्टीरिया में

हिस्टीरिया एक अनियंत्रित उत्तेजना, क्रोध, या आतंक की स्थिति है। इसकी कोई निश्चित परिभाषा नहीं है। बहुधा ऐसा कहा जाता है, हिस्टीरिया अवचेतन अभिप्रेरणा का परिणाम है। अवचेतन अंतर्द्वंद्र से चिंता उत्पन्न होती है और यह चिंता विभिन्न शारीरिक, शरीरक्रिया संबंधी एवं मनोवैज्ञानिक लक्षणों के रूप में प्रकट होती है। हिस्टीरिया रोग होने पर रोगी को मिर्गी के समान दौरे पढ़ते है और यह काफी तकलीफदेह भी होता है |

हिस्टीरिया में हींग को गुण के साथ देते हैं।

हींग के संघटक

हींग के गिंड के हिस्से (25%) में ग्लूकोज, गैलेक्टोज, एल-अरबीनोस, रमनोस और ग्लुकुरोनिक एसिड पाए जाते हैं।

राल रेजिन 40-64 % में फेरिलिक एसिड एस्टर (60%), फ्री फेरिलिक एसिड (1।3%), एसेरसिनोटानोल और फार्नसेफरोल ए, बी और सी, क्यूमरिन डेरिवेटिव्स , क्यूमरिन-सेस्क्वाइटरपेन सिक्काप्लेक्स पाए जाते हैं।

उड़नशील तेल अस्थिर तेल 3-17% में सल्फर में मुख्य घटक, विभिन्न मोनोटर्पेन के रूप में डाइसल्फाइड के साथ यौगिक होते हैं।

अलग – अलग फेरुला स्पीशीज के पौधों से प्राप्त हींग के संगठन एक समान नहीं होते।

  • कार्बोहायड्रेट 68%
  • मिनरल 7%
  • प्रोटीन 4%
  • फाइबर 4%
  • नमी 16%

हींग के आयुर्वेदिक गुण और कर्म

  • रस (taste on tongue): कटु
  • गुण (Pharmacological Action): लघु, तीक्ष्ण, स्निग्ध
  • वीर्य (Potency): उष्ण
  • विपाक (transformed state after digestion): कटु
  • दोष पर असर: वात और कफ को संतुलित करना व पित्त वर्धक

प्रधान कर्म

  • अनुलोमन: द्रव्य जो मल व् दोषों को पाक करके, मल के बंधाव को ढीला कर दोष मल बाहर निकाल दे।
  • कफहर: द्रव्य जो कफ को कम करे।
  • वातहर: द्रव्य जो वातदोष निवारक हो।
  • दीपन: द्रव्य जो जठराग्नि तो बढ़ाये लेकिन आम को न पचाए।
  • पित्तकर: द्रव्य जो पित्त को बढ़ाये।
  • छेदन: द्रव्य जो श्वास नलिका, फुफ्फुस, कंठ से लगे मलको बलपूर्वक निकाल दे।

हींग के उपचारात्मक संकेत

निम्न स्वास्थ्य परिस्थितियों में हींग सहायक है।

  • पीरियड्स में ब्लीडिंग ठीक से नहीं होना
  • अर्धांगघात
  • अवसाद (निष्क्रिय लक्षणों के साथ)
  • अस्थमा
  • आईबीएस
  • आक्षेप
  • उच्च कोलेस्ट्रॉल का स्तर
  • पागलपन
  • कटिस्नायुशूल
  • क्रोनिक ब्रोंकाइटिस
  • गीली खांसी
  • गैस या पेट फूलना
  • चेहरे का पक्षाघात
  • पीरियड में दर्द
  • पक्षाघात
  • पीठ दर्द
  • पेट की ख़राबी
  • प्रीमेनस्ट्रल सिंड्रोम (पीएमएस)
  • भूख में कमी
  • मांसपेशियों की ऐंठन
  • मिरगी
  • संधिशोथ
  • स्वाइन फ्लू (एच 1 एन 1)
  • हिस्ट्रीरिया या अप्रबंधनीय भावनात्मक अतिसंवेदनशीलता

हींग के प्रयोग में सावधानी और नुकसान साइड इफेक्ट्स

हींग के दुष्प्रभाव में दिल की धड़कन पर असर, अतिसंवेदनशीलता, दस्त और सिरदर्द शामिल हैं। यह गर्मी के प्रति संवेदनशील लोगों या गैस्ट्र्रिटिस, जलन, गर्मी की सनसनी या रक्तस्राव विकारों का कारण बन सकती है।

गर्मी और पित्त बढाए

हींग को अधिक मात्रा में नहीं खाना चाहिए। इससे शरीर की धातुओं में उष्मा बढ़ जाती है।

रक्तपित्त में इसका अधिक सेवन समस्या को गंभीर कर सकता है। शरीर में यदि पहले से पित्त बढ़ा है, रक्त बहने का विकार है bleeding disorder, हाथ-पैर में जलन है, अल्सर है, छाले हैं तो भी इसका सेवन न करें।

करे एसिडिटी और जलन

हींग को ज्यादा खाने से पाचन की कमजोरी, लहसुन की तरह वाली डकार, शरीर में जलन, पेट में जलन, एसिडिटी, अतिसार, पेशाब में जलन आदि होता है। ज्यादा खाने पर एसिडिटी, पेट की जलन, सिर में दर्द आदि समस्याएं हो सकती हैं।

जिन्हें पेट में सूजन हो gastritis, वे हींग का सेवन न करें।

सुजा सकती है त्वचा

हींग का बाह्य प्रयोग त्वचा को लाल कर सकता है। यह dermatitis के लक्षण उत्पन्न कर सकता है।

स्पर्म को कर सकती है कम

चूहों में किये गए परीक्षण में हींग के सेवन से क्रोमोसोमल को डैमेज असरदे खा गया ।

अधिक डोज़ करे नुकसान आँतों को

अधिक डोज़ में हींग गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल ट्रैक्ट को गंभीर रूप से नुकसान पहुंचा सकता है और गंभीर सिरदर्द का कारण बन सकता है।

सेफ्टी प्रोफाइल

गर्भावस्था

हींग मासिक स्राव को बढ़ाने वाला और गर्भनाशक माना गया है।

हींग को प्रेगनेंसी में दवा की तरह नहीं लेना चाहिए। यह गर्भाशय संकुचन का कारण बन सकता है और गर्भपात का कारण बन सकता है।

दूध पिलाते समय

बच्चे को दूध पिलाती हैं तो हींग को दवाई की तरह से नहीं लें क्योंकि दूध से बच्चे में जाने पर यह methaemoglobinaemia कर सकता है।

बच्चों में प्रयोग

  • आपको 5 साल से कम आयु के बच्चों में हिंग का उपयोग नहीं करना चाहिए।
  • बच्चों को इसे खिलाएं नहीं। अगर गैस है तो पानी में हींग घुला कर नाभि के पास लगा सकते हैं।
  • शिशुओं को देने पर यह हीमोग्लोबिन को ऑक्सीडाइज कर देता है जिससे methaemoglobinaemia हो जाता है।

सर्जरी से पहले

यदि सर्जरी कराने वाले हैं, तो इसका सेवन 15 दिन पहले से बंद कर दें यह खून पतला करती है, थक्के बनना रोकती है और इन सबसे खून के अधिक बहने की सम्भावना बढ़ जाती है।

ड्रग इंटरेक्शन

हींग उच्चरक्तचाप, एंटीप्लेटलेट और एंटीकोएगुलेंट दवाओं के साथ ड्रग इंटरेक्शन संभव है। इसलिए इन सभी मामलों में सावधानी रखें।

  • उच्च रक्तचाप की दवा
  • एंटीप्लेटलेट दवाएं
  • खून पतला करने की दवा आदि।

हींग को कब इस्तेमाल नहीं करे Contraindications

  • अल्सरेटिव कोलाइटिस
  • गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल ट्रैक्ट के संक्रमण
  • दौरे
  • पेट अल्सरेशन (बड़ा खुराक)
  • पेट खराब
  • रक्तस्राव विकार
  • सर्जरी से पहले और बाद में आदि।

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