आयुर्वेदिक खदिरारिष्ट के उपयोग और लेने का तरीका

खदिरारिष्ट सिरप एक आयुर्वेदिक औषधि है जिसे बैद्यनाथ, दिव्य, पतंजलि, सांडू जैसे बहुत सी कंपनियां बनाती हैं। इसे खदिरारिष्टम या खादिरारिष्ट भी बोलते हैं। यह चर्म रोगों की एक उत्तम औषधि है। जानिये खदिरारिष्ट सिरप की कीमत और प्रयोग का तरीका।

आयुर्वेदिक दवाई, खदिरारिष्ट Khadirarishtam Khadirarisht को खून साफ़ करने, जीवाणुरोधी, पाचन एजेंट के रूप में उपयोग किया जाता है। इसे पीने से खून से विषाक्त पदार्थों दूर होते हैं। इस दवा के नियमित कुछ महीनों तक सेवन करने से मुँहासे, एक्जिमा, सोरायसिस तथा अन्य चमड़ी के रोगों, रक्त विकारों, आंतों के कीड़े, स्प्लेनोमेगाली, पित्ती उछलना, गठिया, दाद, घाव, ट्यूमर इत्यादि में फायदा होता है।

यह मुख्य रूप से उन त्वचा की बीमारियों में फायदेमंद है जिसमें खुजली, त्वचा से तरल पदार्थ का रिसाव, त्वचा पर परत का गठन, मुख्य लक्षण होते है। यह धूल और इसी तरह के एलर्जेंस के संपर्क में त्वचा की एलर्जी प्रतिक्रियाएं में भी फायदा करती है।

खदिरारिष्ट मुख्य रूप से त्वचा रोगों के उपचार में प्रयोग की जाने वाली दवाई है। यह दवाई चमड़ी और आँतों पर विशेष रूप से काम करती है। चमड़ी के रोग होते ही तभी हैं जब खून में गंदगी हो जाए। खून की गंदगी का मतलब, खून में गंद आना नहीं है। इसका मतलब है खून में बुरे पाचन, केमिकल्स वाले भोजन, रोग, बक्टेरिया, प्रदुषण आदि से होने वाला दोष। भोजन में प्रयुक्त प्रेसेर्वेटिव, हवा में मौजूद गैसे, पाचन की विकृति सभी से रक्त शुद्ध नहीं रह पाता और त्वचा पर स्किन डिसीज के रूप में प्रकट होता है। ऐसे में खदिरारिष्ट दवा के माध्यम से पाचन, आँतों और त्वचा के सही काम करने में मदद हो सकती है। यह दवा रोग के मूल कारण पर काम करती है।

खदिरारिष्ट को आयुर्वेद में बताए फर्मेंटेशन के तरीके से तैयार किया जाता है। यह शरीर में कफ और वात को कम करती है। इसे लेने से पित्त बढ़ता है और पाचन के ठीक से होने में मदद होती है। खदिरारिष्ट शरीर में पाचन की कमजोरी से जमा हो जाने वाले वेस्ट प्रोडक्ट को भी सिस्टम से दूर करने में मदद करती है। क्लासिकल दवाई होने से यह बहुत से फार्मेसियों के द्वारा बनाई जा रही है। इसे लेने की डोज़ करीब दस से बीस मिलीलीटर है। लेकिन आपको इसे अपने पाचन के हिसाब से लेना चाहिए। अगर इसे लेने से पित्त बढ़ जाए, पेट में जलन हो, खट्टी डकार आए तो इसकी डोज़ को कम कर के देखें।

खदिरारिष्ट में खदीर, देवदारू, दारुहल्दी, त्रिफला, रैंकोल, नागकेशर, जयफल, लवंग, एला, दालचीनी, पिप्पल, धाई के फूल और गुड आदि हैं। यह एंटीइफ्लेमटऋ, विरोधीपरजीवी और एंटी-ऑक्सीडेंट दवा है।

खदिरारिष्ट को कब इस्तेमाल करते हैं?

खदिरारिष्ट को निम्न मेदिकल कंडीशन में इस्तेमाल करते हैं:

  • आंत के कीड़े
  • एटोपिक डर्माटाइटिस (एक्जिमा)
  • एनीमिया
  • कार्डियामेगेली
  • कुष्ठ रोग
  • ट्यूमर
  • त्वचा एलर्जी
  • त्वचा रोग – एक्जिमा, सोरायसिस, सभी प्रकार की त्वचा रोग
  • पित्ती
  • प्लीहा की स्थिति
  • बढ़ा स्प्लीन
  • बैक्टीरिया हेलिकोबैक्टर के कारण अल्सर
  • मुँहासे
  • मुँहासे वल्गारिस
  • लिपोमा
  • लिम्फ ग्रंथि वृद्धि
  • लिवर की समस्याएं या जांडिस
  • सूजी हुई लसीका ग्रंथियां
  • सोरायसिस

खदिरारिष्ट के फायदे Benefits of Khadirarishtam

खदिरारिष्ट को पीने से खून साफ़ होता है। यह एक एंटीबैक्टीरियल आयुर्वेदिक दवा है। यह विषाक्त पदार्थों और सूक्ष्म जीवों को नष्ट करके काम करती है। इसे लेने से पाचनक्रिया में सुधार होता है और मुँहासे और अन्य त्वचा की समस्याओं जैसे सिस्ट में फायदा होता है। यह हर्बल एक्सट्रेक्ट से बना है और इसका कोई दुष्प्रभाव नहीं है। इसे पीने से त्वचा में चमक आती है।

खदिरारिष्ट और चमड़ी रोग

खदिरारिष्ट चमड़ी के कॉमन रोगों जैसे पिम्पल, एक्ने, पस से भरे गांठों, सिस्टिक घावों,व्हाइटहेड्स और ब्लैकहेड के साथ मुँहासों, एटोपिक डर्माटाइटिस (एक्जिमा) में फायदा होता है। कुजली होती हो तो इसका इस्तेमाल कुछ महीने कर के देखना चाहिये।

खदिरारिष्ट है टॉनिक

खदिरारिष्ट पेट, यकृत और रक्त के लिए एक बहुत अच्छा टॉनिक है। खदिरारिष्ट शरीर से अमा दोष को पचाने और इसे कम करने में मदद कर सकती हैं। आयुर्वेदिक अरिष्ट होने से इसमें कुछ मात्रा में अल्कोहल बनता है जोकि इसकी प्रभावकारिता और जैव उपलब्धता में वृद्धि करता है।

खून करे साफ़ – आम पचक

खदिरारिष्ट में डिटॉक्सिफिकेशन गुण है। यह दवाई हर्बल रक्त शोधक है और त्वचा की बनावट और रंग में सुधार करती है। यह शरीर में जमा वेस्ट को निकालने में सहायता करती है। यह आंतों में विषाक्त पदार्थों और उनके संचय के उत्पादन को रोकता है। यह उन बीमारियों को रोकता है, जो रक्त में विषाक्त पदार्थों के अवशोषण के कारण होती है।

लीवर की करे रक्षा

खदिरारिष्ट यकृत कार्यों को बढ़ाकर शरीर से विषाक्त पदार्थ को निकलती है। इसके अलावा, इसमें कुछ अवयव हैं, जो यकृत की रक्षा करते हैं, और क्षतिग्रस्त जिगर कोशिकाओं की मरम्मत का भी काम करते हैं।

सुधारे पाचन

खदिरारिष्ट पीने से पित्त बढ़ता है/ कब्ज़ दूर होती है और आँतों के कीड़े नष्ट होते है।

प्रोटेक्ट करे बैक्टीरिया से

खदिरारिष्ट में एंटी-बैक्टीरियल एक्शन भी है। यह विशेष रूप से, यह हेलीकॉक्टर बैक्टीरिया में प्रभावी है।

खुजली को करे दूर

खदिरारिष्ट में एंटीप्रुरिटिक गुण है। यह खुजली में आराम देती है।

खदिरारिष्ट की खुराक

इसे लेने की मात्रा 12 – 24 मिलीलीटर है।

इसे दिन में एक या दो बार, आमतौर पर भोजन के बाद लेना चाहिए।

खदिरारिष्ट कैसे लें?

  • भोजन करने के बाद दवा लें।
  • दवा को दिए गए मेजरिंग कप में निकालें। शुरू में कम मात्रा लें।
  • गिलास में दवा की मात्रा के अनुसार पानी लें और दवा मिलालें तथा पी जाएँ।
  • दवा का टेस्ट कडवा और अल्कोहल जैसी गंध होती है। इसलिए बहुत से लोगों को दवा का टेस्ट भाता नहीं है।

खदिरारिष्ट के दुष्प्रभाव

अनुशंसित खुराक में प्राचीन काल से कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं देखा जाता है।

कुछ लोगों में दवा की अधिकता से पेट में जलन हो सकती है। ऐसे में दवा की मात्रा कम कर दें।

गर्भावस्था और स्तनपान

गर्भावस्था और स्तनपान के दौरान इसका प्रयोग नहीं करें।

बच्चों में प्रयोग

बच्चों में इसे आयुर्वेदिक चिकित्सक की देखरेख में प्रयोग करें।

प्राइस

पतंजलि की खदिरारिष्ट 450 ml की कीमत 70 रुपए है।

खदिरारिष्ट का कम्पोजीशन और बनाने का तरीका

  • खदीरा (भीतरी लकड़ी) 2 किलो
  • देवदार – देवदार सीडर या हिमालयी सीडर- देवदारु  2 किलो
  • सोरालेया कोरीलिफोलिया – बाबची  480 ग्राम
  • बर्बेरिस अरिस्टाटा दारुहल्दी  800 ग्राम
  • त्रिफला 800 ग्राम
  • पानी 81.92 किलो

उपरोक्त हर्ब्स का उपयोग करके काढ़ा तैयार किया जाता है जब तक की पानी 8 वें भाग तक कम हो जाए।

काढ़ा बनाने और ठंडा करने के बाद निम्न को डाला जाता है:

  • मिश्री 5 किलो
  • शहद 10 किलो
  • वुडफोर्डिया फ्रूटिकोसा धातकी फूल 800 ग्राम
  • पाइपर लांगम पिपली160 ग्राम
  • लौंग 40 ग्राम
  • पाइपर क्यूबबा कंकोल 40 ग्राम
  • मेसुआ फेरेआ नागकेसर  40 ग्राम
  • छोटी इलायची 40 ग्राम
  • दालचीनी 40 ग्राम
  • तेजपत्ता 40 ग्राम

इन अवयवों को उपरोक्त काढ़े में मिश्रित किया जाता है और प्राकृतिक किण्वन के लिए लगभग एक महीने तक रखा जाता है। 30 से 40 दिनों के बाद, तरल फ़िल्टर किया जाता है और कांच की बोतलों में संग्रहीत किया जाता है।

शेल्फ लाइफ

पुराने अरिष्ट को अच्छा मानते हैं। 5 से 10 साल पुराने अरिष्ट को अधिक इफेक्टिव मानते हैं।

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