कृमिमुदगर रस पेट के कीड़ो की बेजोड़ दवा

कृमिमुदगर रस एक आयुर्वेदिक औषधि है जो की पेट के कृमियों के लिए बहुत ही उपयोगी है और इसके साथ साथ यह कफ को कम करके पाचन ठीक करती है।

कृमि ये कीड़े, दूषित भोजन और पानी से हमारे शरीर के अंदर पहुँच जाते हैं और आँतों में विकसित होने लगते हैं। जो भी भोजन हम करते हैं, जब वह आंत में पहुँचता है तो कीड़े उस पर फीड होते हैं और परिणामतः अच्छा खाने पर भी शरीर कुपोषण और अनीमिया का शिकार हो जाता है। आँतों के कीड़े लम्बे समय तक शरीर में रहते हैं यदि सही से उपचार नहीं किया जाता।

कृमिमुदगर रस टैबलेट रूप में उपलब्ध एक आयुर्वेदिक दवा है जो हेल्मिंथियासिस – आंतों कीड़े के उपद्रव के उपचाके लिए विशेष रूप से निर्मित है। क्लासिकल दवा होने से यह किसी की पेटेंटेड दवा नहीं है और इसे कई आयुर्वेदिक फार्मेसी जैसे डाबर, बैद्यनाथ, झंडू, दिव्य पतंजलि आदि बना रहें हैं. आप इसेआंतों में कीड़े होने पर ले सकते हैं लेकिन आपको यह दवा केवल सख्त चिकित्सा पर्यवेक्षण के तहत लेनी चाहिए क्योंकि इसमें हेवी मेटल्स हैं जो शरीर मे इकट्ठी हो सकती है और अधिक डोज़ या अधिक समय तक लेने पर अंगों पर बुरा असर डाल सकती हैं। साथ है यह बिना डॉक्टर के निर्देश के बच्चो को नहीं दें.

कृमिमुदगर रस संकेत

  • हेल्मिंथियासिस – आंतों कीड़े के उपद्रव
  • कमजोर पाचन

कृमिमुदगर रस के फायदे

कृमिमुदगर रस एक शास्त्रीय आयुर्वेदिक दवा है जिसमें शुद्ध सल्फर, शुद्ध पारा, अजमोद, विडंग आदि मुख्य तत्व हैं। आमतौर पर इस दवा को आंतों कीड़े के इलाज में दिया जाता है। पाचन में सुधार और कृमि से संबंधित जटिलताओं जैसे मतली, थकावट, उल्टी, और सामान्य दुर्बलता, का इलाज करने के लिए भी आप कृमिमुदगर का उपयोग करने पर विचार कर सकते हैं।

कृमियों के खिलाफ प्रभावी

कृमियों की समस्या इतनी कॉमन है कि जनसंख्या का लगभग 1/4 हिस्सा इससे संक्रमित है। राउंड वर्म, हुक कीड़े, पिन वर्म, टेप वर्म आदि आँतों के कीड़े पाचन की दिक्कतें करते हैं। कृमिमुदगर रस में कृमिघ्न गुण है जिससे यह आँतों के कीड़ों का इलाज करता है।

कफ करे कम

कृमिमुदगर रस में कषाय रस, तिक्त अनुरस और कटू विपाक गुण है। यह लघु और रुक्ष होने से कफ के प्रति विरोधी है।

पाचन में सहयोगी

कृमिमुदगर रस में दीपन, पाचन और स्रोत साफ़ करने के गुण है।

कृमिमुदगर रस की डोज़

कृमि मुद्गर रस की 250 मिलीग्राम टेबलेट की डोज़ को दिन में एक या दो बार, भोजन के बाद अथवा डॉक्टर द्वारा निर्देशित रूप में लेना चाहिए। इसे पारंपरिक रूप से मोथा के काढ़े या शहद के साथ लिया जाता है।

डॉक्टर की सलाह के आधार पर इसे 1 – 2 महीने की अवधि के लिए लिया जा सकता है।

साइड इफेक्ट्स

इस दवा को केवल सख्त चिकित्सा पर्यवेक्षण के तहत उपभोग किया जाना चाहिए क्योंकि इससे कुछ प्रतिकूल प्रभाव हो सकते हैं।

गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं को यह दवा नहीं लेनी है।

कृमिमुदगर रस का कम्पोजीशन

  • शुद्ध पारद 3 ग्राम
  • शुद्ध गंधक सल्फर 6 ग्राम
  • अजमोद 9 ग्राम
  • विडंग 12 ग्राम
  • शुद्ध स्ट्रिकनोस नक्स वोमिका 15 ग्राम
  • पलाश 18 ग्राम

वार्निंग

बिना डॉक्टर के परामर्श के यह दवा नहीं लें। यह एक आयुर्वेदिक प्रिस्क्रिप्शन ड्रग है। ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट के अनुसार, भारी धातुओं वाली दवाएं प्रिस्क्रिप्शन दवाइयां हैं।

व्यक्तिगत स्वास्थ्य सलाह के लिए, कृपया आयुर्वेद चिकित्सक से सीधे परामर्श लें।

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