महावातविध्वंसन रस आयुर्वेदिक दवाई के उपयोग

महावातविध्वंसन रस एक शास्त्रीय तैयारी है जो वात दोष के संतुलन को बनाए रखती है। यह आयुर्वेदिक दवा टैबलेट रूप में उपलब्ध है और इसमें भारी धातु सामग्री होती है, इसलिए किसी चिकित्सक की निगरानी इसका उपभोग किया जाना चाहिए। इसका वता विकार, पेट दर्द आदि के उपचार में अच्छा उपयोग है।

महा वातविध्वंसन रस एक आयुर्वेदिक दवा है जिसका प्रयोग मुख्यतः वात विकारों जैसे जोड़ों में दर्द, जोड़ों में सूजन, जोड़ों की सूजन-दर्द से चलने फिरने में असमर्थता, रूमेटोइड गठिया, पक्षाघात, मिर्गी आदि के प्रबंधन में किया जाता है। इस आयुर्वेदिक दवा के सेवन से जोड़ों में दर्द या सूजन को ठीक करने में मदद होती है तथा हड्डी और मांसपेशियों के ऊतकों को पोषण मिलता है। यह दवा सीरियस और क्रोनिक वात रोगों के लिए बनाई गई है तथा इसमें शक्तिशाली आयुर्वेदिक अवयव हैं।

अगर आप सोचते हैं सभी आयुर्वेदिक दवाएं हर्बल होती हैं और इन्हें लेना पूरी तरह से सेफ है तो आप निश्चित रूप से गलत हैं। आयुर्वेद के मुताबिक, “अगर एक उचित जहर भी ठीक से प्रशासित हो तो एक उत्कृष्ट दवा बन सकती है लेकिन दूसरी ओर सबसे उपयोगी दवा भी गलत तरीके से लिए जाने पर जहर की तरह कार्य कर सकती है। कोई भी दवा जो शरीर में असर करती है उसके साइड इफ़ेक्ट भी हो सकते हैं। आयुर्वेदिक दवा जिसमें पारा, सल्फर और भस्में होती हैं वे यदि अधिक डोज़ या अधिक समय तक ली जाएँ तो हानिप्रद हो सकती है।

महावात विध्वंस रस के फायदे

महावात विध्वंस रस को लेने से कठिन से कठिन वात रोग में लाभ होता है। यह वात दोष को संतुलित कर, रोग के लक्षणों में आराम देती है।

राहत दे सूजन और दर्द में

महावात विध्वंस रस में दर्द निवारक और सूजन को उतारने के गुण है। जोड़ों में सूजन और पीड़ा जब अधिक हो और चलला फिरना दिक्कत भरा हो जाये तो डॉक्टर इसकी सलाह देते है। इसे लेने से सूजन कम होती है और दर्द में आराम आता है जिससे चलना फिरना सहज हो जाता है।

मिरगी में करे फायदा

मिर्गी न्यूरोलॉजिकल विकार है। इस रोग में मस्तिष्क में विद्युत गतिविधि की अचानक वृद्धि हो जाती है जिससे रोगी को दौरे पड़ने लगते हैं। मिर्गी में, रोगी असामान्य रूप से व्यवहार करना शुरू कर देता है। महावात विध्वंस रस के प्रयोग से इस रोग के प्रबंधन में सहयता हो सकती है।

तंत्रिकाओं के लिए टॉनिक

महावात विध्वंस रस तंत्रिका टॉनिक है। यह तंत्रिका कोशिकाओं की बीमारी में में फायदेमंद है। यह नसों और मस्तिष्क के बीच खोए गए कनेक्शन को जोड़ने में मदद कर सकता है।

ट्राईजेमिनल न्यूरलजिया में करे फायदा

ट्राइगेमिनल न्यूरेलिया, क्रोनिक दर्द की स्थिति है जो ट्राइगेमिनल तंत्रिका को प्रभावित करती है। इसमें चेहरे से दिमाग तक में सनसनी होती है। यदि आपके पास ट्राइगेमिनल न्यूरेलिया है, चेहरे की हल्की उत्तेजना – जैसे कि दांतों को ब्रश करने या मेकअप से – दर्द का झटका ट्रिगर हो सकता है। ट्राइगेमिनल न्यूरेलिया पुरुषों की तुलना में महिलाओं को अक्सर प्रभावित करती है, और 50 से अधिक उम्र के लोगों में होने की संभावना अधिक होती है।

ट्राईजेमिनल न्यूरलजिया की स्थिति में भी महावात विध्वंस रस लाभ कर सकता है।

महावातविध्वंसन रस के संभावित नुकसान

महावातविध्वंसन रस भी ऐसी ही दवा है जो साइड इफ़ेक्ट कर सकती है। इसमें शुद्ध पारे, सल्फर, धातुओं की भस्मों के साथ साथ वत्सनाभ भी है। वत्सनाभ या एकोनाइट, एंटीप्रेट्रिक, एनाल्जेसिक, एंटी-रूमेटिक, एपेटाइज़र और पाचन को बढ़ाने के लिए आयुर्वेद में दवाओं में इस्तेमाल किया जाता है।

क्रूड एकोनाइट एक बेहद घातक पदार्थ है। इसलिए इसे केवल शोधित करने के बाद ही आयुर्वेद में इस्तेमाल करते हैं। शोधित करने की प्रक्रिया में वत्सनाभ जड़ों को 3-7 दिनों के लिए एक गाय के ताजा मूत्र में डुबोते है। फिर, जड़ के बाहरी आवरण को छील दिया जाता है और छोटे टुकड़ों में काटा जाता है और 1 दिन के लिए सूरज की रोशनी में छोड़ दिया जाता है। इसके बाद, यह कम से कम 3 घंटे के लिए ताजा गाय दूध के साथ उबाला जाता है। अंत में, यह सूरज की रोशनी में सुखाया जाता है जिससे पाउडर बन सके।

शुद्ध वत्सनाभ (ए फेरोक्स वॉल) रूट की सिफारिश की खुराक केवल 15 मिलीग्राम है। इसे ज्यादा डोज़ में लेने से एकोनाइट विषाक्तता हो सकती है। एकोनाइट विषाक्तता के कारण हाइपोटेंशन और ब्रैडकार्डिया हो सकता है। वत्सनाभ की विषाक्तता मुख्य रूप से सीएनएस, दिल और मांसपेशी ऊतकों को प्रभावित करती है। इससे कार्डियोवैस्कुलर सिस्टम पर बुरा असर होता है जिसके परिणामस्वरूप वेंट्रिकुलर टैचिर्डिया, वेंट्रिकुलर फाइब्रिलेशन, एट्रियल फाइब्रिलेशन हो सकता है।

  • पेट में दर्द और भारीपन
  • कम नाड़ी की दर
  • बेहोशी
  • कम रक्तचाप
  • हाथ पैर ठन्डे होना
  • पेशाब रुकना
  • उलटी

जो कोई वत्सनाभ वाली दवा का सेवन कर रहा है उसे फॉर्मूलेशन में वत्सनाभ (ए फेरोक्स वॉल) की मात्रा से अवगत होना चाहिए और केवल दवाओं की सिफारिश की खुराक में और चिकित्सक की देखरेख में ही ऐसी दवाओं का उपयोग करना चाहिए।

महावातविध्वंसन रस को किन रोगों में लिया जाता है?

जैसा नाम से पता चलता है महा वात विध्वंसन रस, को लेने से वात दोष के कारण से होने वाले रोगों का विध्वंस eradication होता है। इसे वात दोष के कारण होने वाले पुराने और गंभीर रोगों में दिया जाता है। यह साधारण फार्मूला नहीं है जिसे किसी भी साधारण रोग में दिया जाए। यह कठिन वात रोग की दवा है। जब जोड़ों में भयंकर दर्द, सूजन आदि लक्षण हों तो इस आमशोषक और वेदनाशामक दवाई का प्रयोग किया जा सकता है।

वात-वृद्धि के लक्षण के साथ होने वाले अपतानक, अपतन्त्रक आक्षेपक, पक्षाघात आदि में इसे दिया जाता है। मानसिक रोग जिनमें वात के लक्षण हों, में भी रस का प्रयोग किया जा सकता है।

  • गठिया
  • जोड़ों का दर्द
  • जोड़ों की सूजन
  • नसों का दर्द
  • पक्षाघात
  • पुराना ऑस्टियोआर्थराइटिस
  • प्लाहा रोगा (स्प्लेनिक बीमारी)
  • बवासीर
  • मांसपेशियों में दर्द
  • मिरगी
  • मिर्गी
  • वात दोष के कारण रोग
  • शूल या कोलिक दर्द
  • संधिशोथ
  • हड्डियों में दर्द

महावात विध्वंसन रस की डोज़

महावात विध्वंसन रस को लेने की डोज़ 65 मिलीग्राम से 125 मिलीग्राम या ½ – 1 रत्ती दिन में एक या दो बार होती है जोकि उम्र, पाचन, ताकत और रोग की स्थिति पर निर्भर है। इसे कभी भी अधिक मात्रा में या लम्बे समय तक नहीं लिया जाना चाहिए। दवा लेते समय यदि कोई भी साइड इफ़ेक्ट लगे तो दवा बंद कर दें और डॉक्टर से संपर्क करे।

इसे निम्न अनुपान के साथ ले सकते हैं:

  • अदरक रस
  • भृंगराज के पत्तों का रस
  • अरंड तेल (कास्टर ऑयल)
  • घृत (घी)
  • मधु (शहद)

महावात विध्वंस रस का कम्पोजीशन

  • पारद शुद्ध 12 ग्राम
  • गंधक शुद्ध 12 ग्राम
  • नाग भस्म 12 ग्राम
  • वंग भस्म 12 ग्राम
  • लोहा भस्म 12 ग्राम
  • ताम्र भस्म 12 ग्राम
  • अभ्रक भस्म 12 ग्राम
  • पिपली 12 ग्राम
  • शुद्ध टंकण 12 ग्राम
  • मारिचा 12 ग्राम
  • शुंठी 12 ग्राम
  • वत्सनाभ 48 ग्राम

भावना द्रव्य (क्यू एस)

  • त्रिकटू क्वाथ भावना 3 बार
  • त्रिफला क्वाथ भावना 3 बार
  • चित्रक मुला क्वाथ भावना 3 बार
  • भृंगराज भावना 3 बार
  • कूठ भावना 3 बार
  • निर्गुन्डी पत्र स्वरस भावना 3 बार
  • अर्का दुग्धा भावना 3 बार
  • अमलाकी भावना 3 बार
  • अर्द्राक भावना 3 बार
  • निंबू स्वरस भावना 3 बार

बनाने का तरीका

  • सभी अवयवों को लेकर मिश्रित किया जाता है। इस पाउडर को मलमल के कपड़े से छान लिया जाता है।
  • शुद्ध पारद और शुद्ध गंधक की कज्जली तैयार की जाती है और अब फ़िल्टर किए गए पाउडर में मिला दी जाती है।
  • भावना द्रव्य से 3 भावना दी जाती है और पेस्ट तैयार किया जाता है।
  • पेस्ट से 120 मिलीग्राम की गोलियों बना कर सुखा ली जाती है।

सावधानी

  • यह केवल वात प्रधान विकार में उपयोगी है।
  • यह गर्भवती, स्तनपान कराने वाली महिलाओं और बच्चों के लिए उपयुक्त नहीं है।
  • आपको सलाह दी जाती है कि बिना आयुर्वेदिक चिकित्सक की सलाह के इस दवा का सेवन नहीं करें। अगर आप ऐसा करते हैं यह आपके लिए खतरनाक साबित हो सकता है क्योंकि इस दवा में भारी धातु, कई खनिज और वत्सनाभ है। इसलिए, आपको कड़ाई से सलाह दी जाती है कि इस आयुर्वेदिक दवा से अपने आप उपचार नहीं करें।
  • इसे बच्चों और पशुओं की पहुँच से दूर रखे।
  • दवा लेते समय कोई भी साइड इफ़ेक्ट लगे तो दवा का सेवन बंद करे दें और डॉक्टर से संपर्क करें।

निर्माता और प्राइस

  • Baidyanath Mahavat Vidhwansan Ras (80tab) MRP 138
  • Patanjali Divya Mahawat Vidhwansan 5 gram @ Rs 30

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