मोती पिष्टी अथवा मुक्ता पिष्टी के फायदे और नुकसान 

मोती पिष्टी अथवा मुक्ता पिष्टी एक आयुर्वेदिक दवा है जो बहुत सारे पेट के रोगों में लाभप्रद है, जानिये इसका सेवन कैसे किया जाता है और इसके नुकसान क्या होते हैं।

मुक्ता या मोती पिष्टी को मोती जिसे पर्ल कहते हैं, से आयुर्वेदिक तरीके से बनाया जाता है। इसे बहुत से रोगों में इस्तेमाल करते हैं। यह पेट के अल्सर, अल्सरेटिव कोलाईटिस और हाइपर एसिडिटी में फायदेमंद है। यह पेट के एसिड के स्राव को संतुलित करती है। मोती पिष्टी में करीब 82-86% कैल्शियम कार्बोनेट होता है जिससे यह एंटासिड जैसे काम करती है और साथ ही कैल्शियम भी देती है।

मोती पिष्टी को विभिन्न पुराने रोगों जैसे क्षय रोग, मधुमेह, अस्थमा, मांसपेशी विकार, आदि में अन्य दवाओं के साथ देते हैं। मोती पिष्टी से शरीर में गर्मी को कम करते हैं। पिष्टी अप्रत्यक्ष गर्मी ( ट्रिट्रिशन) का उपयोग करके तैयार की जाती है।

मुक्ता पिष्टी और भस्म में अंतर

मुक्ता या मोती पिष्टी को मोती के महीन चूर्ण को गुलाब जल के साथ पीसकर बनाया जाता है।जबकि मोती भस्म में आग का इस्तेमाल किया जाता है। मुक्ता भस्म की तुलना में मुक्ता पिष्टी अधिक सौम्य है और ज्यादा फायदेमंद है। अगर दोनों में किसीएक को दवा की तरह से लेना हो तो मोती की पिष्टी को लेना चाहिए।

मुक्ता पिष्टी के फायदे

मुक्ता पिष्टी को लेने से शरीर में पित्त और गर्मी कम होती है। यह दृष्टि, दिल की बीमारियों, पित्त रोग, अल्सर से संबंधित समस्याओं में अच्छे परिणाम सेती है। विभिन्न अन्य अवयवों के साथ यह पुराने या जटिल बीमारी में सहायक है। आयु और ताकत के अनुसार और किसी विशेषज्ञ सलाहपर इस दवा को उचित अनुपान के साथ उपयोग किया जाना चाहिए।

कम करे गर्मी

शीतलक होने से यह शरीर में गर्मी को कम करती है जिससे गर्मी के रोग जैसे हाथ पैर में जलन, नाक से खून गिरना, गर्भाशय से खून जाना, आदि की समस्या कम होती है।

कम करे पित्त और फायदा करे पित्त रोग में

हाइपर एसिडिटी में पेट में एसिड अधिक बनता है। ज्यादा एसिड से अल्सर, अल्सरेटिव कोलाइटिस आदि की दिक्कत होती है। मोती पिष्टी एसिड को कम करती है।

कैल्सियम का स्रोत

मोती पिष्टी कैल्शियम का स्रोत है। इसे लेने से कैल्शियम, कार्बोनेट की फॉर्म में मिलता है।

अंगों को दे बल

मोती पिष्टी हड्डियों, जोड़ों और मांसपेशियों को ताकत देती है। इससे हड्डियों और हृदय को ताकत मिलती है। लो बॉन डेंसिटी में इसे ले सकते हैं। इसे कार्डियोमायोपैथी (हृदय की पेशियों का रोग), में लेने से फायदा होता है। हृदय रोग की दवाओं का यह एक पर्मुख घटक है।

नर्वस सिस्टम को दे ताकत

मोती पिष्टी से नर्वस सिस्टम को बल मिलता है। यह एंग्जायटी, नींद नहीं आना, दौरे पड़ना, गुस्सा आना, सिर दुखना, स्ट्रेस, आदि में फायदा करती है।

स्त्री रोग में फायदा

मोती पिष्टी से औरतों की समस्या जैसे अधिक पीरियड्स की समस्या, पीरियड्स में दर्द, महीने के बीच में खून गिरना अदि में फायदा होता है। इससे कैल्सियम की कमी भी दूर होती है।

मुक्ता पिष्टी के दुष्प्रभाव

  • मोती पिष्टी का कोई दुष्प्रभाव नहीं है और यह संभवतः सुरक्षित है।
  • इसे गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिला भी ले सकती हैं।
  • निम्न रोगों में इसे डॉक्टर की सलाह के बिना नहीं लें:
  • किडनी स्टोन
  • खून में अधिक कैल्शियम
  • पैराथाइरॉइड ग्रंथि की सक्रियता

मुक्ता पिष्टी के आयुर्वेदिक गुण

  • वीर्य: शीत
  • गुण: लघु हल्की
  • रस: मधुर
  • विपाक: मधुर
  • दोष पर प्रभाव: पित्त कफ कम करना
  • अंगों पर प्रभाव: पेट, आंतों, मस्तिष्क, हृदय, नसों, गुर्दों, मूत्राशय, प्रजनन अंग, अंत: स्रावी ग्रंथियां

मुक्ता पिष्टी के संकेत

मुक्ता पिष्टी को अकेले या अन्य दवाओं के साथ लेते हैं। यह निम्नलिखित स्वास्थ्य स्थितियों में सहायक है:

  • अत्यधिक गर्भाशय रक्तस्राव
  • उच्च रक्त चाप
  • एक्यूट और क्रोनिक पेट में सूजन
  • एसिड से सीने में जलन
  • एसिडिटी
  • ऑस्टियोपोरोसिस
  • कम अस्थि खनिज घनत्व
  • कार्डियोमायोपैथ
  • गठिया
  • गर्मी के रोग
  • गुस्सा आना
  • छाले
  • जोड़ों में दर्द या ऑस्टियोपोरोसिस
  • नींद की समस्या
  • मिर्गी
  • शरीर में ज्यादा गर्मी
  • सूखी खाँसी

मुक्ता पिष्टी की डोज़

वयस्कों के लिए डोज़ निम्न है:

  • न्यूनतम खुराक 25 मिलीग्राम, दिन में दो बार।
  • मध्यम खुराक 60 मिलीग्राम से 125 मिलीग्राम दिन में दो बार।
  • अधिकतम संभावित खुराक 250 मिलीग्राम दिन में दो बार।

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